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कालसर्प दोष शांति के लिए चमत्कारी देव मंत्र

Posted On: 10 Aug, 2013 ज्योतिष में

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ज्योतिष विज्ञान के मुताबिक छायाग्रहों (अदृश्य यानी दिखाई न देने वाले) राहु और केतु के कारण कुण्डली में बने कालसर्प योग के शुभ होने पर जीवन में सुख मिलता है, किंतु इसके बुरे असर से व्यक्ति जीवनभर परेशानियों से जूझता रहता है। राहु और केतु को पाप ग्रह माना गया है। कालसर्प योग में ये ग्रह विपरीत भाव व राशियों में होते हैं, जिससे ये अन्य ग्रहों के शुभ फलों में भी बाधा डालते हैं। नागपंचमी (11 अगस्त) कालसर्प दोष शांति की अचूक घड़ी मानी जाती है।


कालसर्प दोष शांति के लिए बताए गए वक्त और पैसा खर्च करने वाले उपाय हर व्यक्ति वहन नहीं कर सकता। किंतु सनातन धर्म में हर रोज देव उपासना संकटमोचन की सबसे सही राह मानी जाती है। इसलिए कालसर्प दोष शांति के लिए नागपंचमी (11 अगस्त) पर कुछ सरल मंत्रों का जप भी बेहद असरदार साबित होता है।


यहां बताया जा रहा है कालसर्प दोष से बचाव के लिए किन-किन देवताओं के मंत्र जप संकटमोचक साबित होते हैं। इन मंत्रों को कम से कम 5 बार सुबह या आराम के वक्त बोलते रहें। अगली स्लाइड के साथ जानिए ये अचूक देव मंत्र -


कालसर्प योग के दोष से मुक्ति के लिए नागों के देवता भगवान शिव की भक्ति और आराधना सबसे श्रेष्ठ उपाय है, जिसके लिए  शिव पंचाक्षरी का स्मरण आसान व असरदार माना गया है। यह मंत्र है-
ऊँ नम: शिवाय।


पुराणों में बताया गया है कि भगवान श्री कृष्ण ने कालिय नाग का मद चूर किया था। इसलिए इस दोष शांति के लिए भगवान श्रीकृष्ण की आराधना भी श्रेष्ठ है। मंत्र है -
ऊं कृं कृष्णाय नम:


- शिव अवतार श्रीहनुमान जी राहु और केतु के कष्टों से छुटकारा दिलाते हैं। इसलिए हनुमान उपासना भी बहुत शुभदायी है।  हनुमानजी के स्मरण के लिए ये मंत्र जरूर बोलें -
हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्।


- शिव के ही अंश बटुक भैरव की आराधना से भी इस दोष से बचाव हो सकता है।
हीं बटुकाय आपदुदारणाय कुरु कुरु बटुकाय हीं।


प्रथम पूज्य शिव पुत्र श्री गणेश को विघ्रहर्ता कहा जाता है। इसलिए कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए गणेश पूजा भी करनी चाहिए।
ऊं गं गणपतये नम:


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