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Tulsidas ka doha in hindi with meaning

Posted On: 10 Jan, 2013 Others में

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Tulsidas ke dohe in hindi with Meaning

तुलसीजे कीरति चहहिं, पर की कीरति खोइ।

तिनके मुंह मसि लागहैं, मिटिहि न मरिहै धोइ।।

अर्थ: ‘‘दूसरों की निंदा कर स्वयं प्रतिष्ठा पाने का विचार ही मूर्खतापूर्ण है। दूसरे को बदनाम कर अपनी तारीफ गाने वालों के मुंह पर ऐसी कालिख लगेगी जिसे  कितना भी धोई जाये मिट नहीं सकती।’’


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Tulsidas ke dohe in hindi with Meaning

तनु गुन धन महिमा धरम, तेहि बिनु जेहि अभियान।

तुलसी जिअत बिडम्बना, परिनामहु गत जान।।

अर्थ: ‘‘सौंदर्य, सद्गुण, धन, प्रतिष्ठा और धर्म भाव न होने पर भी जिनको अहंकार है उनका जीवन ही बिडम्बना से भरा है। उनकी गत भी बुरी होती है।


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Tulsidas ke dohe in hindi with Meaning

बचन बेष क्या जानिए, मनमलीन नर नारि।

सूपनखा मृग पूतना, दस मुख प्रमुख विचारि।।

अर्थ : ‘वाणी और वेश से किसी मन के मैले स्त्री या पुरुष को जानना संभव नहीं है। सूपनखा, मारीचि, रावण और पूतना ने सुंदर वेश धरे पर उनकी नीचत खराब ही थी।’’


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Tulsidas ke dohe in hindi with Meaning

मार खोज लै सौंह करि, करि मत लाज न ग्रास।

मुए नीच ते मीच बिनु, जे इन के बिस्वास।।

अर्थ:  ‘‘वह निबुर्द्धि मनुष्य ही कपटियों और ढोंगियों का शिकार होते हैं। ऐसे कपटी लोग शपथ लेकर मित्र बनते हैं और फिर मौका मिलते ही वार करते हैं। ऐसे लोगों भगवान का न भगवान का भय न समाज का, अतः उनसे बचना चाहिए।


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तुलसीदास के दोहे

राम नाम मनि दीप धरू जीह देहरी द्वार।
तुलसी भीतर बाहरौ जौ चाहसि उजियार।।

दया धर्म का मूल है, पाप मूल अभिमान।
तुलसी दया न छांड़िए, जब लग घट में प्राण॥


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CHANDRA SHEKHAR के द्वारा
January 28, 2015

tulsi k sansar me shukh dukh dono hoye jyani kare jyan murkh kare royen


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