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आखिर क्या महत्व है रंगोली का

Posted On: 5 Nov, 2012 में

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दीपावली आने वाली है. माना जाता है कि दीपावली के शुभ अवसर पर माता लक्ष्मी अपने भकतों पर विशेष स्नेह दर्शाती हैं और उन्हें खूब सारा धन प्रदान करती है. कई लोगों की यह समस्या होती है कि वह दीपावली की पूजा पर किन चीजों को पूजा की थाली में रखे और किन्हें नहीं. आज के इस अंक में इन सभी प्रश्नों का उत्तर लेकर आएं हैं. जानिएं किन चीजों को आपको अपने पूजा की थाली में रखना ही चाहिए.


Pan_ke_patte_1पान और चावल- ये भी दीप पर्व के शुभ-मांगलिक चिह्न हैं। पान घर की शुद्धि करता है तथा चावल घर में कोई काला दाग नहीं लगने देता।


रंगोली- लक्ष्मी पूजन के स्थान तथा प्रवेश द्वार व आंगन में रंगों के संयोजन के द्वारा धार्मिक चिह्नï कमल, स्वास्तिक, कलश, फूलपत्ती आदि अंकित कर रंगोली बनाई जाती है। ऐसा माना जाता है कि देवी लक्ष्मी रंगोली की ओर जल्दी आकर्षित होती है।


ज्वार का पोखरा- दीपावली के दिन ज्वार का पोखरा घर में रखने से धन में वृद्धि होती है तथा वर्ष भर किसी भी तरह के अनाज की कमी नहीं आती। महालक्ष्मी के पूजन के समय ज्वार के पोखरे की पूजा करने से घर में हीरे-मोती जैसी बहुमूल्य वस्तुएं आती हैं।


ईख या गन्ना- लक्ष्मी के ऐरावत हाथी की प्रिय खाद्य-सामग्री ईख है। दीपावली के दिन पूजन में ईख शामिल करने से ऐरावत प्रसन्न रहते हैं और उनकी शक्ति व वाणी की मिठास हमारे घर में फैलती है।


तिलक- पूजन के समय तिलक लगाया जाता है ताकि मस्तिष्क में बुद्धि, ज्ञान और शांति का प्रसार हो। कोई भी पूजन कर्म तिलक के बिना पूरा नहीं होता है।


लच्छा या धागा- यह मांगलिक चिह्नï संगठन की शक्ति का प्रतीक है, जिसे पूजा के समय कलाई पर बांधा जाता है।


वंदनवार- आम या पीपल के नए कोमल पत्तों की माला को वंदनवार कहा जाता है। इसे दीपावली के दिन पूर्वीद्वार या मुख्य पर बांधा जाता है। यह इस बात का प्रतीक है कि समस्त देवी-देवता इन पत्तियों की सुगंध से आकर्षित होकर आपके घर में प्रवेश करते हैं। ऐसी मान्यता है कि दीपावली की वंदनवार पूरे 31 दिनों तक बांधी रखनी चाहिए।

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