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संतोषी माता का व्रत और पूजन विधि : Santoshi Mata Vrat Katha

Posted On: 22 Jul, 2011 में

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हम सातो वारों की व्रत कथा के इस अंक में आपको शुक्रवार को किए जाने वाले संतोषी माता के व्रत के बारे में जानकारी दे रहे हैं. संतोषी माता को हिंदू धर्म में संतोष, सुख, शांति और वैभव की माता के रुप में पूजा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता संतोषी भगवान श्रीगणेश की पुत्री हैं. संतोष हमारे जीवन में बहुत जरूरी है. संतोष ना हो तो इंसान मानसिक और शारीरिक तौर पर बेहद कमजोर हो जाता है. संतोषी मां हमें संतोष दिला हमारे जीवन में खुशियों का प्रवाह करती हैं.


माता संतोषी का व्रत पूजन करने से धन, विवाह संतानादि भौतिक सुखों में वृद्धि होती है. यह व्रत शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार से शुरू किया जाता है .


Santoshi-Maa-1संतोषी माता के व्रत की पूजन विधि


सुख-सौभाग्य की कामना से माता संतोषी के 16 शुक्रवार तक व्रत किए जाने का विधान है.


* सूर्योदय से पहले उठकर घर की सफ़ाई इत्यादि पूर्ण कर लें.

स्नानादि के पश्चात घर में किसी सुन्दर व पवित्र जगह पर माता संतोषी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें.

* माता संतोषी के संमुख एक कलश जल भर कर रखें. कलश के ऊपर  एक कटोरा भर कर गुड़ व चना रखें.

* माता के समक्ष एक घी का दीपक जलाएं.

* माता को अक्षत, फ़ूल, सुगन्धित गंध, नारियल, लाल वस्त्र या चुनरी अर्पित करें.

* माता संतोषी को गुड़ व चने का भोग लगाएँ.

* संतोषी माता की जय बोलकर माता की कथा आरम्भ करें.



इस व्रत को करने वाला कथा कहते व सुनते समय हाथ में गुड़ और भुने हुए चने रखे. सुनने वाला प्रगट ‘संतोषी माता की जय’ इस प्रकार जय जयकार मुख से बोलता जावे. कथा समाप्त होने पर हाथ का गुड और चना गाय को खिला देवें. कलश के ऊपर रखा गुड और चना सभी को प्रसाद के रूप में बांट देवें. कथा से पहले कलश को जल से भरे और उसके ऊपर गुड व चने से भरा कटोरा रखे. कथा समाप्त होने और आरती होने के बाद कलश के जल को घर में सब जगहों पर छिड़कें और बचा हुवा जल तुलसी की क्यारी में सींच देवें. बाज़ार से गुड मोल लेकर और यदि गुड घर में हो तो वही काम में लेकर व्रत करे. व्रत करने वाले को श्रद्धा और प्रेम से प्रसन्न मन से व्रत करना चाहिए.


विशेष: इस दिन व्रत करने वाले स्त्री-पुरुष को ना ही खट्टी चीजें हाथ लगानी चाहिए और ना ही खानी चाहिए.


goddess_santoshi_mataसंतोषी माता की व्रत कथा


एक बुढिया थी जिसके सात बेटे थे. उनमे से छः कमाते थे और एक न कमाने वाला था. वह बुढिया उन छयों को अच्छी रसोई बनाकर बड़े प्रेम से खिलाती पर सातवें को बचा-खुचा झूठन खिलाती थी. परन्तु वह भोला था अतः मन में कुछ भी विचार नहीं करता था. एक दिन वह अपनी पत्नी से बोला – देखो मेरी माता को मुझसे कितना प्रेम है? उसने कहा वह तुम्हें सभी की झूठन खिलाती है, फिर भी तुम ऐसा कहते हो चाहे तो तुम समय आने पर देख सकते हो.


एक दिन बहुत बड़ा त्यौहार आया. बुढिया ने सात प्रकार के भोजन और चूरमे के लड्डू बनाए. सातवाँ लड़का यह बात जांचने के लिए सिर दुखने का बहाना करके पतला कपडा ओढ़कर सो गया और देखने लगा माँ ने उनको बहुत अच्छे आसनों पर बिठाया और सात प्रकार के भोजन और लड्डू परोसे. वह उन्हें बड़े प्रेम से खिला रही है. जब वे छयो उठ गए तो माँ ने उनकी थालियों से झूठन इकट्ठी की और उनसे एक लड्डू बनाया. फिर वह सातवें लड़के से बोली “अरे रोटी खाले.” वह बोला ‘ माँ मैं भोजन नहीं करूँगा मैं तो परदेश जा रहा हूँ.’ माँ ने कहा – ‘कल जाता है तो आज ही चला जा.’ वह घर से निकल गया. चलते समय उसे अपनी पत्नी की याद आयी जो गोशाला में कंडे थाप रही थी. वह बोला – “हम विदेश को जा रहे है, आएंगे कछु काल. तुम रहियो संतोष से, धरम अपनों पाल.”


इस पर उसकी पत्नी बोली


जाओ पिया आनन्द से, हमारी सोच हटाए.

राम भरोसे हम रहे, ईश्वर तुम्हें सहाय.

देहु निशानी आपणी, देख धरूँ मैं धीर.

सुधि हमारी ना बिसारियो, रखियो मन गंभीर.


इस पर वह लड़का बोला – ‘मेरे पास कुछ नहीं है. यह अंगूठी है सो ले और मुझे भी अपनी कोई निशानी दे दे. वह बोली मेरे पास क्या है? यह गोबर भरे हाथ है. यह कहकर उसने उसकी पीठ पर गोबर भरे हाथ की थाप मार दी. वह लड़का चल दिया. ऐसा कहते है, इसी कारण से विवाह में पत्नी पति की पीठ पर हाथ का छापा मारती है.


चलते समय वह दूर देश में पहुँचा. वह एक व्यापारी की दुकान पर जाकर बोला ‘ भाई मुझे नौकरी पर रख लो.’ व्यापारी को नौकर की जरुरत थी. अतः बोला तन्ख्वाह काम देखकर देंगे. तुम रह जाओ. वह सवेरे ७ बजे से रात की १२ बजे तक नौकरी करने लगा. थोड़े ही दिनों में सारा लेन देन और हिसाब – किताब करने लगा. सेठ के ७ – ८ नौकर चककर खाने लगे. सेठ से उसे दो तीन महीने ने आधे मुनाफे का हिस्सेदार बना दिया. बारह वर्ष में वह नामी सेठ बन गया और उसका मालिक उसके भरोसे काम छोड़कर कहीं बाहर चला गया.


उधर उसकी औरत को सास और जिठानियाँ बड़ा कष्ट देने लगी. वे उसे लकडी लेने जंगल में भेजती. भूसे की रोटी देती, फूटे नारियल में पानी देती. वह बड़े कष्ट से जीवन बिताती थी. एक दिन जब वह लकडी लेने जा रही थी तो रास्ते में उसने कई औरतों को व्रत करते देखा. वह पूछने लगी – ‘बहनों यह किसका व्रत है, कैसे करते है और इससे क्या फल मिलता है ? तो एक स्त्री बोली ‘ यह संतोषी माता का व्रत है इसके करने से मनोवांछित फल मिलता है, इससे गरीबी, मन की चिंताएँ, राज के मुकद्दमे. कलह, रोग नष्ट होते है और संतान, सुख, धन, प्रसन्नता, शांति, मन पसंद वर मिले व बाहर गये हुए पति के दर्शन होते है.’ उसने उसे व्रत करने की विधि बता दी.


Santhosi mata vrat katha उसने रास्ते में सारी लकडियाँ बेच दी व गुड और चना ले लिया. उसने व्रत करने की तैयारी की. उसने सामने एक मंदिर देखा तो पूछने लगी ‘ यह मंदिर किसका है ?’ वह कहने लगे ‘ यह संतोषी माता का मंदिर है.’ वह मंदिर में गई और माता के चरणों में लोटने लगी. वह दुखी होकर विनती करने लगी ‘माँ ! मैं अज्ञानी हूँ. मैं बहुत दुखी हूँ. मैं तुम्हारी शरण में हूँ. मेरा दुःख दूर करो.’ माता को दया आ गयी. एक शुक्रवार को उसके पति का पत्र आया और अगले शुक्रवार को पति का भेजा हुआ धन मिला. अब तो जेठ जेठानी और सास नाक सिकोड़ के कहने लगे ‘ अब तो इसकी खातिर बढेगी, यह बुलाने पर भी नहीं बोलेगी.’


वह बोली ‘ पत्र और धन आवे तो सभी को अच्छा हैं.’ उसकी आँखों में आंसू आ गये. वह मंदिर में गई और माता के चरणों में गिरकर बोली हे माँ ! मैंने तुमसे पैसा कब माँगा था ? मुझे तो अपना सुहाग चाहिये. मैं तो अपने स्वामी के दर्शन और सेवा करना मांगती हूँ. तब माता ने प्रसन्न होकर कहा – ‘जा बेटी तेरा पति आवेगा.’ वह बड़ी प्रसन्नता से घर गई और घर का काम काज करने लगी. उधर संतोषी माता ने उसके पति को स्वप्न में घर जाने और पत्नी की याद दिलाई. उसने कहा माँ मैं कैसे जाऊँ, परदेश की बात है, लेन – देन का कोई हिसाब नहीं है.’ माँ ने कहा मेरी बात मान सवेरे नहा – धोकर मेरा नाम लेकर घी का दीपक जलाकर दंडवत करके दुकान पर बैठना. देखते देखते सारा लेन – देन साफ़ हो जायेगा. धन का ढेर लग जायेगा.


सवेरे उसने अपने स्वप्न की बात सभी से कही तो सब दिल्लगी उडाने लगे. वे कहने लगे कि कही सपने भी सत्य होते है. पर एक बूढे ने कहा ‘ भाई ! जैसे माता ने कहा है वैसे करने में का डर है ?’ उसने नहा धोकर, माता को दंडवत करने घी का दीपक जलाया और दुकान पर जाकर बैठ जाया. थोडी ही देर में सारा लेन देन साफ़ हो गया, सारा माल बिक गया और धन का ढेर लग गया. वह प्रसन्न हुआ और घर के लिए गहने और सामान वगेरह खरीदने लगा| वह जल्दी ही घर को रवाना हो गया.


उधर बेचारी उसकी पत्नी रोज़ लकडियाँ लेने जाती और रोज़ संतोषी माता की सेवा करती. उसने माता से पूछा – हे माँ ! यह धूल कैसी उड़ रही है ? माता ने कहा तेरा पति आ रहा है. तूं लकडियों के तीन बोझ बना लें. एक नदी के किनारे रख, एक यहाँ रख और तीसरा अपने सिर पर रख ले. तेरे पति के दिल में उस लकडी के गट्ठे को देखकर मोह पैदा होगा. जब वह यहाँ रुक कर नाश्ता पानी करके घर जायेगा, तब तूँ लकडियाँ उठाकर घर जाना और चोक के बीच में गट्ठर डालकर जोर जोर से तीन आवाजें लगाना, ” सासूजी ! लकडियों का गट्ठा लो, भूसे की रोटी दो और नारियल के खोपडे में पानी दो. आज मेहमान कौन आया है ?” इसने माँ के चरण छूए और उसके कहे अनुसार सारा कार्य किया.


वह तीसरा गट्ठर लेकर घर गई और चोक में डालकर कहने लगी “सासूजी ! लकडियों का गट्ठर लो, भूसे की रोटी दो, नारियल के खोपडे में पानी दो, आज मेहमान कौन आया है ?” यह सुनकर सास बाहर आकर कपट भरे वचनों से उसके दिए हुए कष्टों को भुलाने ले लिए कहने लगी ‘ बेटी ! तेरा पति आया है. आ, मीठा भात और भोजन कर और गहने कपडे पहन.’ अपनी माँ के ऐसे वचन सुनकर उसका पति बाहर आया और अपनी पत्नी के हाथ में अंगूठी देख कर व्याकुल हो उठा. उसने पूछा ‘ यह कौन है ?’ माँ ने कहा ‘ यह तेरी बहू है आज बारह बरस हो गए, यह दिन भर घूमती फिरती है, काम – काज करती नहीं है, तुझे देखकर नखरे करती है. वह बोला ठीक है. मैंने तुझे और इसे देख लिया है, अब मुझे दुसरे घर की चाबी दे दो, मैं उसमे रहूँगा.


माँ ने कहा ‘ ठीक है, जैसी तेरी मरजी.’ और उसने चाबियों का गुच्छा पटक दिया. उसने अपना सामान तीसरी मंजिल के ऊपर के कमरे में रख दिया. एक ही दिन में वे राजा के समान ठाठ – बाठ वाले बन गये. इतने में अगला शुक्रवार आया. बहू ने अपनी पति से कहा – मुझे संतोषी माता के व्रत का उद्यापन करना है. वह बोला बहुत अच्छा ख़ुशी से कर ले. जल्दी ही उद्यापन की तैयारी करने लगी. उसने जेठ के लड़कों को जीमने के लिए कहा. उन्होंने मान लिया. पीछे से जिठानियों ने अपने बच्चों को सिखादिया ‘ तुम खटाई मांगना जिससे उसका उद्यापन पूरा न हो.’ लड़कों ने जीम कर खटाई मांगी. बहू कहने लगी ‘ भाई खटाई किसी को नहीं दी जायेगी. यह तो संतोषी माता का प्रसाद है.’ लडके खड़े हो गये और बोले पैसा लाओ| वह भोली कुछ न समझ सकी उनका क्या भेद है| उसने पैसे दे दिये और वे इमली की खटाई मंगाकर खाने लगे. इस पर संतोषी माता ने उस पर रोष किया. राजा के दूत उसके पति को पकड़ कर ले गये. वह बेचारी बड़ी दुखी हुई और रोती हुई माताजी के मंदिर में गई और उनके चरणों में गिरकर कहने लगी ‘ हे ! माता यह क्या किया ? हँसाकर अब तूँ मुझे क्यों रुलाने लगी ?’ माता बोली पुत्री मुझे दुःख है कि तुमने अभिमान करके मेरा व्रत तोडा है और इतनी जल्दी सब बातें भुला दी. वह कहने लगी – ‘ माता ! मेरा कोई अपराध नहीं है. मुझे तो लड़को ने भूल में दल दिया. मैंने भूल से ही उन्हें पैसे दे दिये. माँ मुझे क्षमा करो मैं दुबारा तुम्हारा उद्यापन करुँगी.’ माता बोली ‘ जा तेरा पति रास्ते में आता हुआ ही मिलेगा.’ उसे रास्ते में उसका पति मिला. उसके पूछने पर वह बोला ‘ राजा ने मुझे बुलाया था ‘ मैं उससे मिलने गया था. वे फिर घर चले गये.


कुछ ही दिन बाद फिर शुक्रवार आया. वह दुबारा पति की आज्ञा से उद्यापन करने लगी. उसने फिर जेठ के लड़को को बुलावा दिया. जेठानियों ने फिर वहीं बात सिखा दी. लड़के भोजन की बात पर फिर खटाई माँगने लगे. उसने कहा ‘ खटाई कुछ भी नहीं मिलेगी आना हो तो आओ.’ यह कहकर वह ब्राह्मणों के लड़को को लाकर भोजन कराने लगी. यथाशक्ति उसने उन्हें दक्षिणा दी. संतोषी माता उस पर बड़ी प्रसन्न हुई, माता की कृपा से नवमे मास में उसके एक चंद्रमा के समान सुन्दर पुत्र हुआ. अपने पुत्र को लेकर वह रोजाना मंदिर जाने लगी.

एक दिन संतोषी माता ने सोचा कि यह रोज़ यहाँ आती है. आजमैं इसके घर चलूँ. इसका सासरा देखूं. यह सोचकर उसने एक भयानक रूप बनाया. गुड व् चने से सना मुख, ऊपर को सूँड के समान होठ जिन पर मक्खियां भिनभिना रही थी. इसी सूरत में वह उसके घर गई. देहली में पाँव रखते ही उसकी सास बोली ‘ देखो कोई डाकिन आ रही है, इसे भगाओ नहीं तो किसी को खा जायेगी.’ लड़के भागकर खिड़की बन्द करने लगे. सातवे लड़के की बहु खिड़की से देख रही थी. वह वही से चिल्लाने लगी ” आज मेरी माता मेरे ही घर आई है.’ यह कहकर उसने बच्चे को दूध पीने से हटाया. इतने में सास बोली ‘ पगली किसे देख कर उतावली हुई है, बच्चे को पटक दिया है.’


इतने में संतोषी माता के प्रताप से वहाँ लड़के ही लड़के नज़र आने लगे. बहू बोली ” सासूजी मैं जिसका व्रत करती हूँ, यह वो ही संतोषी माता हैं. यह कह कर उसने सारी खिड़कियां खोल दी. सबने संतोषी माता के चरण पकड़ लिए और विनती कर कहने लगे – “हे माता ! हम मूर्ख हैं, अज्ञानी है, पापिनी है, तुम्हारे व्रत की विधि हम नहीं जानती, तुम्हारा व्रत भंग कर हमने बहुत बड़ा अपराध किया है. हे जगत माता ! आप हमारा अपराध क्षमा करो.” इस पर माता उन पर प्रसन्न हुई. बहू को जैसा फल दिया वैसा माता सबको दें.


संतोषी माता की आरती – Santoshi Mata ki Aarti



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35 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

kuldeep के द्वारा
May 1, 2015

जय माँ संतोषी की जय माँ मई भी तेरा एक भक्त हूँ माँ मेरी मनोकामना पूर्ण कर दे माँ अगर मेरी मनोकामना ३ शुक्रवार तक पूरी हो जाएगी तो में या मेरे परिवार का सदस्य १६ व्रत संतोषी माँ का रखेंगे माँ अब शिर्फ़ आपके ऊपर ही मेरा भरोसा है

Baljeet Kaur के द्वारा
December 20, 2014

10/10/2014 कार्तिक शुक्रवार संतोषी माँ की 16 शुक्रवार व्रत शुरू किया गया। 23/01/2015 को संतोषी माँ का उद्यापन समारोह होगा ,10 बजे से शाम 4 बजे गंगा पूजा और माँ संतोषी का घट विसर्जन होगा । 卐 माँ संतोषी के सारे भक्तजनों को जहां जहां हैं , सादर आमंत्रित हैं।卐 Address- vill- torpa, near patrol pump, Khunti , Jharkhand 835227 Contact- 9570054834, 7352061389

    RANJANA के द्वारा
    March 26, 2015

    KAL MERA UDHYAPAN H PLZ AAP MUJE BATA SKTE H KI UDHYAPAN KESE KRU MUJE KYA KYA KRNA HOGA PLZ

Ram G Singh के द्वारा
December 12, 2014

Jai Maa Santoshi Jesa sabko diya vesa hame bhi dena mata. Jai mata santoshi.

ranjan kumar के द्वारा
December 7, 2014

Jai maa santoshi. Maa main bhi apka varat shuru karnewala hoo.aur mujhe bahut khushi ho rahi hai.maa badi aash lekar apki puja shuru karne jaa raha hoo.jai maa santoshi

vaishali के द्वारा
December 5, 2014

can poja is started from 2nd friday of shuklyapaksh. And in evening the vidhi can i do or only early morning.

ANAND SHARMA के द्वारा
November 25, 2014

परमात्मा, यानि परम, श्रेष्ठ आत्मा..!! वही तो परमात्मा है..!! जिसे सुकीर्ति, सुयश के द्वारा ही जाना और समझा जा सकता है..!! उसे, भजन कीर्तन बंदना आदि में नहीं ढूंढा जा सकता. और, तब शायद वह मिलेगा भी नहीं. गुण, सगुण, या दुर्गुण आदि तो, व्यवहार जगत में, इंसान की निजिता का विषय है..!! जब कि, ज्ञान या परम सत्य को जानना या समझना, बुद्धि की योग्यता पर ही निर्भर करता है. स्वादों के सिमरन से, क्या जीभ की रसना कभी लरजती है..? नहीं. ज्ञान, या जिज्ञासा का भाव भी, तब सिमरन के भाव से, कभी छोटा नहीं होता..?

Baljeet Kaur के द्वारा
November 23, 2014

** ॐ श्री जय माँ संतोषी * * माँ संतोषी का भोग व्रत, नियम करने वालों के लिए – चना , गुड़, नारियल, तुलसी पत्ता , केला। और जो नियम नहीं मानते उनके लिए- गुड़ , नारियल , केला , तुलसी पत्ता। 卐卐卐 संतोषी माता की जय 卐 卐 卐

ANAND SHARMA के द्वारा
November 22, 2014

भारत मे, फिल्मी दुनियाँ की, एक अद्भुत कहानी की, यह एक मुस्लिम एक्टर्स, डायरेक्टर्स है. जिसका नाम नुसरत भरूच है. इसे फेश बुक पर सर्च करके देखा और समझा जा सकता है..?

Baljeet Kaur के द्वारा
November 20, 2014

** ॐ श्री जय माँ संतोषी * * माँ संतोषी की कृपा उन पर जरुर होती है। जो शिव परिवार में आस्था रखते हैं। माँ संतोषी की चरण की शरण मांगीये सब कुछ मिल जाएगा परब्रह्म परमेश्वर ईश्वर एक के पास से आई हुई है जो साक्षात महालक्ष्मी है। 卐卐卐 संतोषी माता की जय 卐卐卐

Baljeet Kaur के द्वारा
November 10, 2014

** श्री माँ संतोषी** रूठ गई है , यह तो जानते हैं, क्योंकि कार्य पूर्ण नहीं होता है । लेकिन माँ को मनाना क्यों नहीं जानते हैं, अगर मनाना जान जाएंगे तो सब दुखः ही दूर हो जाएगा । माँ संतोषी तो संतोष की देवी हैं, तो मन से, तन से और सच्ची श्रद्धा से मना कर देखे जैसे खट्ट , मांसाहारी वारन कर।

Varsha Chaudhary के द्वारा
November 7, 2014

Bolo sa ntoshi mata ki jai

Baljeet Kaur के द्वारा
November 1, 2014

किसी की माँ संतोषी पर आस्था है कि माँ उसकी कामना पूर्ण करें, काकामना भी सही होनी चाहिए माँ अवश्य पूर्ण करेंगी। माँ संतोषी तो अपने भक्तों के दुःखों को दूर करने की प्रेरणा देती हैं, किसी के जरिए। ** जय माँ संतोषी**

Baljeet Kaur के द्वारा
October 27, 2014

” माँ संतोषी” “माँ संतोषी का जो पूजा व्रत नहीं कर सकते वे माँ का नियम ही माने तो व्रत पूजा जैसा ही फल देती है , क्योंकि माँ , मैया , माता है। अगर कुछ भी न करें केवल माँ संतोषी का जाप भी करे तो भी फल देती है।

Baljeet Kaur के द्वारा
October 22, 2014

1/09 / 1990 में माँ संतोषी का व्रत प्रारंभ की और उसके बाद 03 / 08 / 1998 में सिद्धि प्राप्त की । माँ संतोषी ने कहा कि तुमने संसार में आकर बहुत बडा काम किया है जो अपने घर में मां का पूजन रखा जिसके चलते मैं तेरे जरिए भक्तों के दुखः को दूर कर रही हूं । माँ संतोषी की पुजा व्रत गुरुवार नहाए खाए शुक्रवार पुजा व्रत शनिवार पारण ऊं जय मां संतोषी ।

saurabh verma के द्वारा
October 3, 2014

माता रानी  की   जय

कुलदीप कुमार के द्वारा
October 3, 2014

जय संतोषी माँ

Bimalesh Kumar के द्वारा
September 5, 2014

jai santoshi maa,jai santoshi maa,jai santoshi maa,jai santoshi maa,jai santoshi maa,bigri bnanewali maa teri jai ho,laj bachanewali teri jai ho.jai matadi.jai santoshi maa,

sandeep sharma के द्वारा
July 25, 2014

jai mari mata santoshi ji ki mata ji pls mari sari mushkile hal kar do mare upar bohat karj hai pls us se mujhe mukti do mein bidhi purvak apke 16 vrat karungi pls mata ji mane aapke bare mein bohat suna hai mujhe bhi apke hone ka abhas karvao jai maa satoshi.

Hema Bhrijesh Patel के द्वारा
July 4, 2014

माँ मेरी बिगडी बना दो माँ जय़ संतोषी माता

RAKESH TANWAR के द्वारा
June 27, 2014

JAI SANTOSHI MATA SABKI MANOKAMNA PURN KARE……….

tera bakht maa के द्वारा
June 27, 2014

jai santoshi maa, hai maa sbaki manokamna puri ki mujpe bi kripa kar, mera bi karj khatam kar , shuk shanti de maa. kripa kar

Hema Bhrijesh Patel के द्वारा
May 19, 2014

जय संतोषी माता माँ मैं आपसे प्रार्थना करती ह्नू की मेरी सभी मनोकामना पूर्ण करो देवी माँ मुझे जल्द से जल्द मेरे पति बृजेश के घर पहुंचा दो माँ प्लीज माँ जय संतोषी माता

Pushpa Bbaskar Chandan के द्वारा
April 25, 2014

Jai Santhoshi Maatha. Maatha tumhari krupa mere aur mere parwar ke sabhi logon per hamesha bani rahe. Hamesha ham sam santhos se rahe. hamare sabhi achi kamana puri ho. mere maa, pati, bhai, bahan, bacho ka sabhi ichcha pura karde Maatha. hamare sabhi bigadi kam poora karde Maatha. Jai Santhoshi Matha

Hema Bhrijesh Patel के द्वारा
April 21, 2014

जय संतोषी माता

jainty के द्वारा
April 4, 2014

jai meri santoshi maa apni karpya mujh aur mere pure parivar per hamesha ke liye banaye rakhna hamse kabhi naraj mat ho na per haath hamesha hum per rakhna bigde kaam bana do maa mera ghar khushiyon se bhar do maa………. jaikara santoshi maayi rani ka . jai meri santoshi maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa.

hema rawat के द्वारा
February 21, 2014

Jai ma santoshi. …ma mujse koe galti hogayi h bhul se muje maf karo muje rasta dikhao mai kya karu. .mai bahut badi muskil mai hu…madad kari ma nadad karo dirf tumhara he Sahara h…jai ma santoshi. ..

    jainty के द्वारा
    April 4, 2014

    WAIT KARO MAA SAB THIK KER DEGI.

suman के द्वारा
February 7, 2014

जय संतोष माँ…. माँ आप जानती हो मेरी लाइफ मैं क्या प्रॉब्लम है और मुझे पूरा विश्वास है कि बोहत जल्दी आप मेरी परेशानियों को दूर कर देंगी जय माता रानी की… करती हु तुमहरा व्रत मैं स्वीकार करो माँ मजधार मे मैं अटकी बेडापार करो माँ बेडापार करो माँ… ऐ माँ संतोषी ऐ माँ संतोषी .

suman के द्वारा
February 7, 2014

जय संतोषी माँ जय संतोषी माँ जय संतोषी माँ जय संतोषी माँ

Naveen Sen के द्वारा
December 27, 2013

जै संतोषी माता की 

sanjay के द्वारा
April 13, 2013

धन्यवाद् आभारी आहे. !! संतोषी माता की जय !! !! संतोषी माता की जय !! !! संतोषी माता की जय !! !! संतोषी माता की जय !! !! संतोषी माता की जय !! !! संतोषी माता की जय !! !! संतोषी माता की जय !! !! संतोषी माता की जय !! !! संतोषी माता की जय !! !! संतोषी माता की जय !! !! संतोषी माता की जय !! !! संतोषी माता की जय !! !! संतोषी माता की जय !! !! संतोषी माता की जय !! !! संतोषी माता की जय !! !! संतोषी माता की जय !! !! संतोषी माता की जय !! !! संतोषी माता की जय !! !! संतोषी माता की जय !! !! संतोषी माता की जय !! !! संतोषी माता की जय !! !! संतोषी माता की जय !! !! संतोषी माता की जय !!

    Deepak Kumar negi के द्वारा
    December 20, 2013

    मेंने भी माता के व्रत करना शुरू किया है देखता हु माता मुज पर बी प्रसन्न होती है या नहीं मुझे भी उम्मीद है कि माता मुझपर जरूर प्रसन्न होगी ‘ ये मेरा बिश्वास है जय माता संतोषी मुझ अभागे पर भी प्रसन्न होना माता मेरी इज्जत बचा लो मुझे भी संतोष दो मुझे भी अपना पुत्र समझो आप तो मेरी माता हो माँ संतोषी जय माँ संतोषी जय माँ संतोषी हे माँ संतोषी आपकी सदा ही जय-जय कार हो माँ संतोषी बोलो संतोषी माता कि जय

    suman के द्वारा
    February 7, 2014

    बोलो संतोषी माता की जय….मुझे पता है माता मुझसे नाराज है मगर मुझे पूरा विश्वास है माता रानी मुझे ज़रूर माफ़ करेगी और मेरी सारी परेशानियों को दूर करेंगी………जय संतोषी माँ जय संतोषी माँ.

    sagar pawar के द्वारा
    April 4, 2014

    JAY SANTOSHI MAA, JAY SANTOSHI MAA …………JAY SANTOSHI MAA AAP SABHI KO PRASAN HO AUR MUJEBHI HO HE MAA MADAD KARO JAY SANTOSHI MAA


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