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Aarti Shri Saraswati Mata Ki : श्री सरस्वती माता जी की आरती

Posted On: 30 Mar, 2011 Others में

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भारत एक धार्मिक देश है. यहां हर विशेष अवसर के लिए किसी न किसी देवी या भगवान की पूजा की जाती है. जीवन में सबसे महत्वपूर्ण होता है ज्ञान, और भारत में ज्ञान और विद्या की देवी को मां सरस्वती के नाम से जाना जाता है.


saraswati-mata

मां सरस्वती के आशिर्वाद से ही हम सभी अक्षरों का ज्ञान पाने में सक्षम हैं, शब्द और स्वर उन्हीं की देन हैं. सरस्वती को साहित्य, संगीत, कला की देवी माना जाता है. हाथों में वीणा लिए सरस्वती मां इस बात का संकेत भी देती हैं कि संगीत भी शिक्षा की ही पूरक है. मन्दबुद्धि लोगों के लिए गायत्री महाशक्ति का सरस्वती तत्त्व अधिक हितकर सिद्घ होता है. बौद्धिक क्षमता विकसित करने, चित्त की चंचलता एवं अस्वस्थता दूर करने के लिए सरस्वती साधना की विशेष उपयोगिता है.


आप भी सरस्वती मां की वन्दना में अपना शीष झुकाएं और ज्ञान की देवी की पूजा कर उनसे विद्या का वरदान प्राप्त करें.


सरस्वती वन्दना:

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता

या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।

या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता

सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥1॥


शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं

वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌।

हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्‌

वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्‌॥2॥



श्री सरस्वती मां की आरती


आरती कीजै सरस्वती की, जननि विद्या बुद्धि भक्ति की।

आरती कीजै सरस्वती की, जननि विद्या बुद्धि भक्ति की।

जाकी कृपा कुमति मिट जाए, सुमिरन करत सुमति गति आये।

शुक सनकादिक जासु गुण गाये, वाणि रूप अनादि शक्ति की।

आरती कीजै सरस्वती की, जननि विद्या बुद्धि भक्ति की।

नाम जपत भ्रम छूट दिये के, दिव्य दृष्टि शिशु उधर हिय के।

मिलहिं दर्श पावन सिय पिय के, उड़ाई सुरभि युग-युग, कीर्ति की।

आरती कीजै सरस्वती की, जननि विद्या बुद्धि भक्ति की।

रचित जासु बल वेद पुराणा, जेते ग्रन्थ रचित जगनाना।

तालु छन्द स्वर मिश्रित गाना, जो आधार कवि यति सती की।

आरती कीजै सरस्वती की, जननि विद्या बुद्धि भक्ति की।

सरस्वती की वीणा-वाणी कला जननि की।

आरती कीजै सरस्वती की, जननि विद्या बुद्धि भक्ति की।।

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Dr.Navdeep Gaur के द्वारा
November 13, 2012

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