Best Web Blogs    English News

facebook connectrss-feed

Religious Mantra, Festivals, Vrat katha, Poojan Vidhi

विविध धर्मों-त्यौहारों के रीति-रिवाज, पूजा पद्धति, धार्मिक मंत्रों का समग्र संकलन

193 Posts

154 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.

BRIHASPATI JI KI AARTI – आरती श्री बृहस्पति देव की

पोस्टेड ओन: 24 Mar, 2011 जनरल डब्बा में

वीरवार को भगवान बृहस्पति की पूजा का विधान है. बृहस्पति देवता को बुद्धि और शिक्षा का देवता माना जाता है. वीरवार को बृहस्पति देव की पूजा करने से धन, विधा, पुत्र तथा मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. परिवार में सुख तथा शांति रहती है. गुरुवार का व्रत जल्दी विवाह करने के लिये किया जाता है.

इसे भी पढ़े: Chanakya Niti In Hindi



लेकिन गुरुवार की पूजा करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि पूजा विधि-विधान के अनुसार हो. व्रत वाले दिन प्रात: काल में उठकर बृहस्पति देव का पूजन करना चाहिए. वृ्हस्पति देव का पूजन पीली वस्तुएं, पीले फूल, चने की दान, पीली मिठाई, पीले चावल आदि का भोग लगाकर किया जाता है. इस व्रत में केले का पूजन ही करें. कथा और पूजन के समय मन, कर्म और वचन से शुद्घ होकर मनोकामना पूर्ति के लिये वृहस्पतिदेव से प्रार्थना करनी चाहिये. दिन में एक समय ही भोजन करें. भोजन चने की दाल आदि का करें, नमक न खा‌एं, पीले वस्त्र पहनें, पीले फलों का प्रयोग करें, पीले चंदन से पूजन करें. पूजन के बाद भगवान बृहस्पति की कथा सुननी चाहिये .


lord_bhrishpati

आरती श्री बृहस्पति देवता की


जय वृहस्पति देवा, ऊँ जय वृहस्पति देवा ।

छिन छिन भोग लगाऊँ, कदली फल मेवा ॥

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।

जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी ॥

चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता।

सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता ॥

तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े।

प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्घार खड़े ॥

दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी ।

पाप दोष सब हर्ता, भव बंधन हारी ॥

सकल मनोरथ दायक, सब संशय हारो ।

विषय विकार मिटाओ, संतन सुखकारी ॥

जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहत गावे ।

जेठानन्द आनन्दकर, सो निश्चय पावे ॥

BRIHASPATI JI KI AARTI


Om Jai Bhraspati Deva, Jai Bhraspati Deva. Chin chin Bhoog Lagaoon Phal Mewa II OM II

Tum Puran Parmatama, tum Antaryami. Jagatpita Jagdeeshvar tum sabke Swami II OM II

Charnamrit nij nirmal, sab patak harta. Sakal Manorath Dayak, kripa karo Bharta II OM II

Tan Mann Arpankar jo jann sharan pade. Prabhu prakat tab hokar, Aakar Dwar Khade II OM II

Deen Dayal DayaNiddhi, Bhaktan Hitkari. Paap Dosh sab Harta, Bhav Bandhan Haar II OM II

Sakal Manorath Dayak, sab Sanshay taro. Vishay Vikar Mitao Santan Sukhkari II OM II

Jo Koi Aarti teri Prem Sahit Gave. Jaeshtanand Band so so Nischay Pave II OM II

Sab Bolo Vishnu Bhagwan ki Jai. Sab Bolo Bhraspati Bhagwan ki Jai .


इसे भी पढ़े:

Vaishno devi aarti


ऐसे हुआ हनुमान जी का जन्म: कथा


टैग: BRIHASPATI JI KI AARTI, BRIHASPATI JI KI AARTI IN HINDI, THURSDAY AARTI IN HINDI, HINDI STORY, बृहस्पतिवार की आरती, हिन्दी आरती, माता रानी की आरती



Tags: Roshan  https://www.facebook.com/rddubeyup  Roshan Dhar Dubey  http://rdshayri.blogspot.com/  rddubeyup@gmail.com  रोशन धर दुबे  

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (10 votes, average: 3.90 out of 5)
Loading ... Loading ...

1 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Similar articles : No post found

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Ram के द्वारा
December 8, 2011

I’m really happy dat i’m getting to read brihaspati dev vrat katha from jagran junction. great thanks to all team members of jagran junction for publishing this beautiful and workful stories and aarties.




  • ज्यादा चर्चित
  • ज्यादा पठित
  • अधि मूल्यित